अर्थव्यवस्था के लिए क्यों जरूरी है FDI?
किसी भी देश की जीडीपी और विकास दर को रफ्तार देने में विदेशी निवेश की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। हालांकि, विदेशी निवेश दो प्रकार का होता है, जिन्हें समझना जरूरी है:
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FII (विदेशी संस्थागत निवेश): ये निवेशक शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और बॉन्ड्स में पैसा लगाते हैं। इन्हें 'हॉट मनी' भी कहा जाता है क्योंकि ये बाजार के उतार-चढ़ाव या वैश्विक तनाव (जैसे अमेरिका-ईरान विवाद) के दौरान तेजी से पैसा निकाल लेते हैं, जिससे बाजार गिर जाता है।
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FDI (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश): यह निवेश भौतिक रूप से होता है, जैसे फैक्ट्रियां लगाना, बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) तैयार करना और कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदना। यह निवेश दीर्घकालिक (Long-term) होता है और इसे आसानी से देश से बाहर नहीं निकाला जा सकता।
महत्व: FDI से न केवल देश में नई तकनीक और रोजगार के अवसर पैदा होते हैं, बल्कि इससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी मजबूत होता है। पिछले दो सालों का ट्रेंड दिखाता है कि दुनिया के बड़े निवेशकों को भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और घरेलू खपत (Consumption) पर पूरा भरोसा है।
पैसा आकर्षित करने के लिए RBI और सरकार के बड़े कदम
वैश्विक बाजार में मची उथल-पुथल के बीच विदेशी पूंजी को भारत में बनाए रखने और नए निवेशकों को आकर्षित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सरकार ने कई बड़े और रणनीतिक कदम उठाए हैं:
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सरकारी बॉन्ड्स (G-Secs) पर टैक्स छूट: सरकार ने एक नए अध्यादेश के जरिए विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs/FPIs) के लिए सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) से होने वाली ब्याज आय और कैपिटल गेन्स टैक्स को पूरी तरह माफ कर दिया है।
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निवेश सीमाओं को हटाना: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए जनरल रूट के तहत शॉर्ट-टर्म इन्वेस्टमेंट लिमिट, कंसंट्रेशन लिमिट और सिक्योरिटी-वाइज लिमिट जैसी कड़े प्रतिबंधों को हटा दिया गया है।
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फॉरेक्स स्वैप और FCNR(B) योजना: बैंकों को विदेशी मुद्रा अनिवासी (FCNR-B) डिपॉजिट पर ब्याज दरों की सीमा से छूट दी गई है, ताकि वे प्रवासी भारतीयों (NRIs) से अधिक डॉलर आकर्षित कर सकें। साथ ही सरकारी कंपनियों के विदेशी लोन (ECB) के लिए रियायती फॉरेक्स स्वैप विंडो खोली गई है।
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Fully Accessible Route (FAR) का विस्तार: विदेशी निवेशकों के लिए 15, 30 और 40 वर्ष की लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड्स और सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स के रास्ते खोल दिए गए हैं ताकि देश में टिकाऊ और लंबे समय तक रुकने वाली पूंजी आ सके।