बनारस न्यूज डेस्क: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (IMS) परिसर से आत्महत्या का एक बेहद दुखद और सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां सुश्रुत हॉस्टल की छठी मंजिल पर बने एक कमरे से 26 वर्षीय जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर का शव बरामद हुआ है। शुरुआती जांच के मुताबिक, डॉक्टर ने अपने हाथ में आईवी (IV) ड्रिप लगाकर एनेस्थीसिया (बेहोश करने वाली दवा) की अत्यधिक खुराक (ओवरडोज) लेकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।
मृतक डॉक्टर की पहचान ऋत्विक कुंदू के रूप में हुई है, जो पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के रहने वाले थे। वह आईएमएस-बीएचयू के एनेस्थीसियोलॉजी विभाग से अपनी मेडिकल की पीजी (रेसिडेंसी) की पढ़ाई कर रहे थे। घटना का खुलासा तब हुआ जब ऋत्विक अपनी ड्यूटी और क्लास में नहीं पहुंचे। काफी देर तक संपर्क न होने पर जब उनके सहकर्मी हॉस्टल के कमरे पर गए, तो बार-बार दरवाजा खटखटाने के बाद भी अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में दरवाजा तोड़ा गया, तो अंदर ऋत्विक अचेत अवस्था में पड़े थे और उनके हाथ में कैनुला व ड्रिप लगी हुई थी।
तलाशी के दौरान पुलिस को कमरे से तीन पन्नों का एक हस्तलिखित भावुक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है। इस पत्र में ऋत्विक ने अपने माता-पिता और बहन से माफी मांगते हुए लिखा कि वह उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सके। उन्होंने लिखा कि वे अपने माता-पिता के सबसे बड़े सहारे और आंखों के तारे थे, लेकिन जिंदगी बाहर से जितनी आसान दिखती है, अंदर से उतनी ही मुश्किल और संघर्षपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी मर्जी से यह कदम उठा रहे हैं और इसके लिए किसी को भी परेशान न किया जाए।
ऋत्विक ने अपने सुसाइड नोट में विशेष रूप से एक युवती का जिक्र करते हुए लिखा कि वह उनसे बहुत प्यार करती थी और उसने उनके लिए बहुत कुछ किया है, इसलिए उनकी मौत के लिए उस पर कोई आरोप न लगाया जाए। लंका थाना पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर मोर्चरी में रखवा दिया है और मृतक के परिजनों को सूचित कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सुसाइड नोट और फोरेंसिक साक्ष्यों की बारीकी से जांच की जा रही है, हालांकि मौत के सटीक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।