पीएम मोदी ने कहा, "पश्चिम एशिया के हालातों को देखते हुए मैंने देशवासियों से कुछ बातें साझा की थीं। मैंने लोगों से अपील की थी कि वे कुछ समय के लिए सोना (Gold) खरीदने से बचें, जब तक कि स्थिति सामान्य नहीं हो जाती। इसके साथ ही मैंने विदेश में छुट्टियां न मनाने और ईंधन बचाने के लिए कारपूलिंग करने का आग्रह किया था। मैं देश के हर नागरिक का आभारी हूं कि उन्होंने इस संकट काल में देश की अर्थव्यवस्था और संसाधनों को मजबूत बनाए रखने के लिए हर तरह से सहयोग किया।"
सोशल मीडिया पर 'सकारात्मक बदलाव' की बयार
प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम में इस बात का विशेष जिक्र किया कि देश के कई परिवारों ने सोशल मीडिया पर खुद आगे बढ़कर अपनी कहानियां और फैसले शेयर किए हैं। कई लोगों ने देशहित में अपनी नियोजित विदेश यात्राओं को स्थगित करने और शादियों के सीजन में भारी-भरकम सोना खरीदने के फैसले को कुछ समय के लिए टालने के बारे में पोस्ट लिखी हैं, जो भारतीय समाज की एकजुटता को दर्शाता है।
संकट से निपटने के लिए पीएम मोदी की प्रमुख अपीलें
इस साल की शुरुआत में पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की सप्लाई बाधित होने की आशंका के बीच पीएम मोदी ने देश की आर्थिक सुरक्षा के लिहाज से कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे:
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ईंधन और ऊर्जा की बचत: जहां तक संभव हो कारपूलिंग का उपयोग करना और कंपनियों द्वारा 'वर्क फ्रॉम होम' (घर से काम करने) को प्राथमिकता देना।
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आर्थिक नियंत्रण: कम से कम एक साल तक पर्यटन के लिए विदेश यात्रा से बचना और देश के भीतर ही 'देखो अपना देश' के तहत यात्रा करना। इसके अलावा सोने (Gold) के आयात को कम करने के लिए इसकी खरीदारी पर रोक लगाना।
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आत्मनिर्भरता और स्वदेशी: खाना पकाने के तेल (एडिबल ऑयल) का इस्तेमाल कम करना, प्राकृतिक खेती को अपनाना और पूरी तरह से स्वदेशी (लोकल) उत्पादों को प्राथमिकता देना।
पीएम मोदी ने अंत में जोर देकर कहा कि वैश्विक मंदी और युद्ध के बादलों के बीच भारतीय नागरिकों की यह समझदारी और जन-भागीदारी ही देश को किसी भी बड़े आर्थिक संकट से सुरक्षित रखने में सबसे बड़ा कवच साबित होगी।