अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीतिक गलियारों में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत और 16 अन्य देशों से आयात किए जाने वाले सामानों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ (Tariff) लगाने का अंतिम आदेश जारी किया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत कुल 60 देशों पर नए टैरिफ की घोषणा की है। यह कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त निर्देशों के तहत उन देशों पर की गई है, जो जबरन मजदूरी (Forced Labor) से बने सामान के आयात-निर्यात पर प्रभावी रोक लगाने में विफल रहे हैं।
भारत की श्रेणी में बदलाव और अमेरिका का तर्क
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने अपने बयान में कहा कि यह कदम मानवाधिकारों के उल्लंघन और व्यापार के गलत तरीकों को सुधारने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है, ताकि दुनिया भर में श्रमिकों के कल्याण को सुनिश्चित किया जा सके।
-
टैरिफ में राहत का पहलू: इससे पहले भारत उन देशों की सूची में शामिल था जिन पर 12.5% टैरिफ प्रस्तावित था। हालाँकि, अब इसे घटाकर 10% की श्रेणी में रख दिया गया है।
-
17 प्रमुख देश शामिल: 10% की इस टैरिफ श्रेणी में भारत के साथ-साथ कनाडा, ब्रिटेन (UK), बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे 17 देश शामिल हैं।
भारत का नीतिगत कदम और सुप्रीम कोर्ट का फैसला
एक आधिकारिक फेडरल नोट के अनुसार, जून में अमेरिका द्वारा प्रस्तावित टैरिफ घोषणा के तुरंत बाद भारत ने ठोस प्रशासनिक कदम उठाए थे। 14 जून को भारत ने अपनी विदेश व्यापार नीति (Foreign Trade Policy) में संशोधन करते हुए जबरन मजदूरी से तैयार सामानों के आयात पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी।
यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति द्वारा आपातकालीन शक्तियों के जरिए लगाए गए पिछले 'पारस्परिक टैरिफ' (Reciprocal Tariffs) को गैर-कानूनी करार दे दिया था। इसके जवाब में ट्रंप प्रशासन ने धारा 301 का सहारा लेते हुए सभी देशों पर अस्थायी रूप से 10% शुल्क लागू किया और विस्तृत जांच शुरू की।
द्विपक्षीय व्यापार और भारत की आपत्ति
भारत ने USTR द्वारा शुरू की गई इन दोनों जांचों और उनके निष्कर्षों पर कड़ा ऐतराज जताया है। भारतीय पक्ष का तर्क है कि इन मुद्दों को दोनों देशों के बीच चल रही द्विपक्षीय व्यापार वार्ता (Bilateral Trade Negotiations) के तहत सुलझाया जाना चाहिए।
अमेरिका वर्तमान में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और भारतीय निर्यात के लिए सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय बाजार है। वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार:
अमेरिका द्वारा उठाए गए इस नए टैरिफ कदम से भारतीय निर्यातकों और श्रम-गहन उद्योगों (Labor-Intensive Industries) पर असर पड़ने की संभावना है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक बातचीत में इस मुद्दे की अहमियत और बढ़ गई है।