सुपरपावर अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने सबसे महंगे और तकनीकी रूप से उन्नत अभियानों—जैसे 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर', 'एपिक फ्यूरी' और 'प्रोजेक्ट फ्रीडम'—में अरबों डॉलर झोंक दिए हैं. महीनों की लगातार बमबारी, अत्याधुनिक स्टेल्थ लड़ाकू विमानों और प्रिसिजन-गाइडेड हथियारों के इस्तेमाल के बावजूद अमेरिका अपने मुख्य लक्ष्यों को हासिल करने में संघर्ष करता दिख रहा है. ईरान का मिसाइल नेटवर्क और यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम आज भी उसके अभेद्य भूमिगत ठिकानों में सुरक्षित है.
1. 'ईरानी किला': अंडरग्राउंड मिसाइल सिटीज और यूरेनियम
अमेरिका की सबसे बड़ी विफलता ईरान के भूमिगत सैन्य ढांचे (Underground Nuclear & Missile Sites) को पूरी तरह नष्ट न कर पाना रही है.
-
अभेद्य गहराई: ईरान ने पिछले दो दशकों में अपने परमाणु और मिसाइल ठिकानों को पहाड़ों के सैकड़ों फीट नीचे 'ईगल 44' जैसी मिसाइल सिटीज में तब्दील कर दिया है.
-
पारंपरिक बमबारी की सीमा: अमेरिका के सबसे भारी बंकर-बस्टर बम भी इन अत्यधिक गहराई में बने कंक्रीट के ढांचों को पूरी तरह तबाह करने में असमर्थ साबित हुए हैं.
-
त्वरित पुनर्निर्माण: जिन सतह के ढांचों को नुकसान पहुंचाया भी गया, ईरान ने अपनी स्वदेशी इंजीनियरिंग और बैकअप सप्लाई चेन के दम पर उन्हें कुछ ही हफ्तों में फिर से क्रियाशील कर दिया.
2. विषमतापूर्ण युद्ध (Asymmetric Warfare) और लागत का खेल
यह युद्ध तकनीक से ज्यादा आर्थिक और रणनीतिक सहनशक्ति का बन चुका है:
-
सस्ते ड्रोन बनाम महंगे इंटरसेप्टर: ईरान बेहद कम लागत वाले 'शाहिद' (Shahed) ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहा है. इन्हें रोकने के लिए अमेरिका और उसके सहयोगियों को लाखों डॉलर की 'पैट्रियट' (Patriot) और 'थैड' (THAAD) मिसाइलें दागनी पड़ रही हैं.
-
सप्लाई चेन पर दबाव: अरबों डॉलर खर्च करने के बाद भी अमेरिकी रक्षा उद्योग उतनी तेजी से एयर-डिफेंस मिसाइलें नहीं बना पा रहा है, जितनी तेजी से ईरान उनका उपभोग करवा रहा है.
3. अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सीधा प्रहार
जॉर्डन, कुवैत, इराक और सीरिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने अब ईरान के गाइडेंस सिस्टम से लैस बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन के सीधे निशाने पर हैं.
रणनीतिक संकट: अमेरिका का मुख्य लक्ष्य अपने सहयोगियों और बेस की सुरक्षा करना था, लेकिन आज वही ठिकाने ईरान के 'प्रॉक्सी नेटवर्क' और सीधी मिसाइल क्षमता के सामने रक्षात्मक मुद्रा में आ चुके हैं.
4. क्षेत्रीय और राजनीतिक असर
वाशिंगटन में इसे भले ही एक सीमित और नियंत्रण में रखी गई सैन्य कार्रवाई के रूप में पेश करने की कोशिश की जा रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है:
-
अरब में प्रभुत्व को चुनौती: संपूर्ण अरब क्षेत्र में अमेरिकी सुरक्षा छत्र (Security Umbrella) पर सवाल खड़े हो गए हैं.
-
संसाधनों की बर्बादी: अमेरिकी करदाताओं का अरबों डॉलर का राजस्व इस युद्ध में स्वाहा हो रहा है, बिना किसी स्पष्ट रणनीतिक जीत के.
-
ईरान का बढ़ता मनोबल: कड़े प्रतिबंधों और सैन्य दबाव के बावजूद ईरान का समृद्ध यूरेनियम भंडार और मिसाइल मारक क्षमता घट नहीं रही, बल्कि बढ़ रही है.