मॉस्को/तेहरान: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर ग़ालिबाफ ने वाशिंगटन को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अमेरिकी धमकियों के दबाव में नहीं, बल्कि केवल ईरान की शर्तों और व्यवस्था के तहत ही दोबारा खोला जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच हुआ अस्थायी युद्धविराम समझौता पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है और अमेरिकी सेना ने ईरानी ठिकानों पर व्यापक हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। ग़ालिबाफ ने जोर देकर कहा कि अमेरिका ने अब तक यह नहीं सीखा है कि अपनी प्रतिबद्धताओं को तोड़ने और धौंस जमाने की भारी कीमत चुकानी पड़ती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान पर हमले जारी रहे, तो अमेरिकी सेना को कड़ा जवाबी हमला झेलना पड़ेगा।
इस कूटनीतिक गतिरोध से पहले फारस की खाड़ी में स्थित अबू मूसा द्वीप, बंदर अब्बास, चाबहार और सिरिक जैसे ईरानी तटीय शहरों में भारी विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं, जहां ईरानी वायु रक्षा प्रणालियों ने अमेरिकी लक्ष्यों पर गोलीबारी की। अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने इन हमलों की पुष्टि करते हुए दावा किया कि यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हाल ही में हुए ईरानी हमलों के जवाब में की गई है। इसके तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक घोषणा की कि दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoU) और युद्धविराम अब प्रभावी नहीं रहा।
जवाब में ईरान ने अमेरिका पर द्विपक्षीय समझौतों के उल्लंघन का आरोप लगाया और बहरीन तथा कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल दागकर जवाबी कार्रवाई की। हमलों के दौरान बहरीन में सायरन बजने लगे और वहां के गृह मंत्रालय ने नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की हिदायत दी है। वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले इस व्यापारिक मार्ग पर युद्ध के बादल मंडराने से दुनिया भर के बाजारों में खलबली मच गई है