मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच हुआ संघर्षविराम पूरी तरह से टूट चुका है, जिसके बाद अमेरिकी सेना ने ईरानी ठिकानों पर भीषण बमबारी शुरू कर दी है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 48 घंटों में हुए अमेरिकी हवाई हमलों में कम से कम 14 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 78 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के पांच अलग-अलग प्रांतों को निशाना बनाया है, जिससे पूरे क्षेत्र में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है।
तनाव की मुख्य वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Hormuz Strait) में वाणिज्यिक जहाजों पर हाल ही में हुए हमले हैं, जिसका जिम्मेदार अमेरिका ने ईरान को ठहराया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापारिक मार्गों को बाधित करने का प्रयास किया गया, तो इसका और भी आक्रामक जवाब दिया जाएगा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के नेतृत्व में नौसेना और वायुसेना ने दक्षिणी ईरान में स्थित मिसाइल सिस्टम, एयर डिफेंस नेटवर्क, तटीय रडार और आईआरजीसी (IRGC) के ड्रोन अड्डों को तबाह कर दिया है।
ईरान के तटीय शहरों चाबहार और बंदर अब्बास में रात भर जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। अमेरिका का दावा है कि ये हमले वैश्विक तेल आपूर्ति के सबसे व्यस्त जलमार्ग को सुरक्षित रखने के लिए किए गए हैं। बहरहाल, इस जवाबी सैन्य कार्रवाई से वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में उछाल और शेयर बाजारों में अस्थिरता का खतरा पैदा हो गया है, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं चिंता में हैं।