मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सैन्य झड़प के बाद वैश्विक रक्षा बाजार में दो हथियार प्रणालियां सबसे ज्यादा चर्चा में रहीं—चीन का J-10C फाइटर जेट और भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल। पाकिस्तान की ओर से J-10C की क्षमता को लेकर किए गए दावों और चीन द्वारा इसे अपनी रक्षा निर्यात उपलब्धियों के रूप में पेश किए जाने के बाद इस लड़ाकू विमान पर दुनिया का ध्यान गया। दूसरी ओर, भारत की ब्रह्मोस मिसाइल पहले से ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना चुकी है और कई देशों ने इसमें रुचि दिखाई है।
अब सवाल यह है कि पिछले एक साल में किस हथियार प्रणाली को ज्यादा खरीदार मिले, इनकी कीमत में कितना अंतर है और तकनीकी रूप से कौन कितना प्रभावी है।
J-10C के खरीदारों की स्थिति
चीन के J-10C फाइटर जेट की बात करें तो इसकी अंतरराष्ट्रीय सफलता अभी सीमित दिखाई देती है। पाकिस्तान इसका सबसे बड़ा और प्रमाणित विदेशी ग्राहक है। पाकिस्तान ने वर्ष 2022 से अपने वायुसेना बेड़े में J-10C को शामिल करना शुरू किया और करीब 36 विमानों को शामिल किया जा चुका है।
इसके अलावा इंडोनेशिया ने J-10C खरीदने में रुचि दिखाई और 42 विमानों के लिए लगभग 9 अरब डॉलर की संभावित डील की खबरें सामने आईं। हालांकि इस सौदे की अंतिम स्थिति और डिलीवरी टाइमलाइन को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है।
बांग्लादेश ने भी J-10C के लिए बातचीत शुरू की थी और करीब 20 विमानों की संभावित खरीद की खबरें आई थीं। हालांकि बाद की रिपोर्टों में यह संकेत मिले कि ढाका यूरोफाइटर टाइफून जैसे अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। ऐसे में यह सौदा अभी निश्चित नहीं माना जा सकता।
मिस्र, उज्बेकिस्तान, ईरान और ब्राजील जैसे देशों ने J-10C का मूल्यांकन जरूर किया, लेकिन अभी तक इन देशों की ओर से कोई बड़ा पक्का ऑर्डर सामने नहीं आया है। इससे साफ है कि चीन के लिए J-10C का निर्यात बाजार अभी शुरुआती चरण में है।
ब्रह्मोस मिसाइल की बढ़ती मांग
भारत और रूस के संयुक्त सहयोग से विकसित ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल रक्षा बाजार में एक अलग स्थान रखती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी तेज गति, सटीक निशाना लगाने की क्षमता और समुद्र, जमीन तथा हवा से लॉन्च किए जाने की क्षमता है।
भारत ने फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल का निर्यात किया है, जो भारतीय रक्षा निर्यात के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। इसके अलावा दक्षिण-पूर्व एशिया, खाड़ी क्षेत्र और अन्य देशों में भी इस मिसाइल को लेकर रुचि बढ़ी है।
ब्रह्मोस की मांग का एक कारण यह भी है कि कई देश कम लागत में अपनी नौसैनिक और तटीय सुरक्षा क्षमता मजबूत करना चाहते हैं। सुपरसोनिक गति के कारण इसे रोकना कई मौजूदा रक्षा प्रणालियों के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
कीमत और तकनीकी अंतर
J-10C एक बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है, जिसकी कीमत हथियार पैकेज और तकनीकी कॉन्फिगरेशन के आधार पर बदल सकती है। इसमें आधुनिक रडार, लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
वहीं ब्रह्मोस एक मिसाइल प्रणाली है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से दुश्मन के ठिकानों, जहाजों और रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है। यह किसी फाइटर जेट की तरह बहुउद्देश्यीय प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि एक विशेष हमलावर हथियार प्रणाली है।
दोनों की तुलना सीधे तौर पर करना आसान नहीं है, क्योंकि J-10C एक विमान है जबकि ब्रह्मोस एक मिसाइल प्रणाली है। दोनों का उपयोग अलग-अलग सैन्य जरूरतों के लिए किया जाता है।
रक्षा बाजार में किसकी बढ़त?
अगर केवल निर्यात सफलता की बात करें तो ब्रह्मोस ने भारत को ज्यादा मजबूत स्थिति दिलाई है, क्योंकि इसे वास्तविक विदेशी ग्राहक मिल चुके हैं और इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। वहीं J-10C के लिए चीन को अभी बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी विश्वसनीयता साबित करनी बाकी है।
हालांकि J-10C को पाकिस्तान जैसे ग्राहक मिलने और कुछ अन्य देशों में रुचि दिखने से चीन को उम्मीद है कि भविष्य में इसका निर्यात बढ़ सकता है। दूसरी ओर ब्रह्मोस भारत के लिए न केवल एक सैन्य हथियार बल्कि रक्षा निर्यात की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
कुल मिलाकर, दोनों प्रणालियां अपने-अपने क्षेत्र में मजबूत हैं, लेकिन वैश्विक रक्षा बाजार में वर्तमान समय में ब्रह्मोस को अधिक स्थिर और सफल निर्यात उत्पाद के रूप में देखा जा रहा है।