वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए बिना किसी विलंब शुल्क के इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि आज, 31 जुलाई है। आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर अंतिम समय में रिटर्न दाखिल कर रहे करोड़ों वेतनभोगी टैक्सपेयर्स के बीच ओल्ड (Old) और न्यू (New) टैक्स रिजीम के चयन को लेकर अक्सर भ्रम की स्थिति बनी रहती है। कई सैलरीड कर्मचारियों का मानना है कि यदि वित्तीय वर्ष की शुरुआत में उन्होंने अपने नियोक्ता (Employer) को न्यू टैक्स रिजीम का विकल्प दिया था और उसी आधार पर टीडीएस (TDS) कटा है, तो वे अब इसे बदल नहीं सकते।
हालांकि, आयकर नियमों के अनुसार वेतनभोगी करदाताओं के लिए यह एक बड़ी राहत की बात है। वेतनभोगियों (Salaried Class) के पास ITR दाखिल करते समय टैक्स रिजीम बदलने का पूर्ण अधिकार होता है। यदि वर्ष के दौरान कंपनी ने न्यू टैक्स रिजीम के तहत टैक्स काटा है, लेकिन धारा 80C, 80D और HRA जैसी कटौती (Deductions) का दावा करने पर ओल्ड टैक्स रिजीम में कुल टैक्स देनदारी कम बनती है, तो अंतिम फॉर्म सबमिट करने से पहले ओल्ड टैक्स रिजीम को चुना जा सकता है।
यदि ओल्ड टैक्स रिजीम चुनने के बाद रिफंड की स्थिति बनती है, तो आयकर विभाग काटे गए अतिरिक्त TDS की राशि टैक्सपेयर के बैंक खाते में रिफंड कर देगा। कर विशेषज्ञों का सुझाव है कि ITR फाइल करने से पहले दोनों रिजीम के तहत टैक्स कैलक्यूलेटर से तुलना अवश्य कर लें, क्योंकि व्यावसायिक आय (Business Income) वाले व्यक्तियों के लिए रिजीम बदलने के नियम सैलरीड कर्मचारियों से भिन्न और सीमित होते हैं।