नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में उपजे भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में आई रुकावटों के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की वित्तीय स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान कच्चे माल की लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी और खुदरा कीमतों को स्थिर बनाए रखने के कारण देश की तीनों प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों—इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL)—को कुल मिलाकर 18,150 करोड़ रुपये का बड़ा एकल शुद्ध घाटा सहन करना पड़ा है।
वित्तीय समीक्षा के अनुसार, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड को सर्वाधिक 11,526 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा, वहीं भारत पेट्रोलियम को 3,962 करोड़ रुपये तथा देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑयल को 2,661 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है। यद्यपि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम बढ़ने और ईंधन की घरेलू बिक्री में मजबूती के चलते तीनों कंपनियों का सम्मिलित परिचालन राजस्व 24 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 5.79 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया, किंतु विपणन मार्जिन पर पड़े अत्यधिक दबाव ने कंपनियों के मुनाफे को घाटे में तब्दील कर दिया।
राहत की बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भारतीय क्रूड बास्केट की औसत कीमतों में जून और जुलाई महीनों के दौरान क्रमिक गिरावट दर्ज की गई है, जिससे चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में कंपनियों के परिचालन प्रदर्शन में सुधार की उम्मीद बंधी है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की दरें स्थिर बनी रहती हैं और वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति सुचारू रहती है, तो आने वाले महीनों में सार्वजनिक तेल विपणन कंपनियों का वित्तीय घाटा कम हो सकता है।