बर्न/नई दिल्ली: भारत के केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल आज शुक्रवार (12 जून 2026) से स्विट्जरलैंड की दो दिवसीय अत्यंत महत्वपूर्ण आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस उच्च-स्तरीय दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच हस्ताक्षरित ऐतिहासिक 'व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते' (TEPA) के जमीनी क्रियान्वयन को गति देना तथा द्विपक्षीय व्यापार व संस्थागत निवेश को नए स्तर पर ले जाना है। ईएफटीए ब्लॉक में स्विट्जरलैंड के अलावा नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन जैसे मजबूत यूरोपीय देश शामिल हैं। भारत ने मार्च 2024 में इस महत्वाकांक्षी समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जो पिछले साल अक्टूबर 2025 से दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक रूप से पूरी तरह प्रभावी (इन्फोर्स) हो चुका है।
वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, अपनी यात्रा के पहले दिन केंद्रीय मंत्री गोयल स्विट्जरलैंड की राजधानी बर्न में वहां के संघीय राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन (Guy Parmelin) और आर्थिक मामलों की राज्य सचिव हेलेन बुडलिगर आर्टिएडा से आमने-सामने की रणनीतिक द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। बैठक का मुख्य एजेंडा समझौते के तहत ईएफटीए देशों द्वारा आगामी 15 वर्षों में भारत में 100 अरब अमेरिकी डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की प्रतिबद्धता को पूरा करना और इसके जरिए भारत में 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने के रोडमैप को अंतिम रूप देना है। इसके अतिरिक्त, वे स्विस फार्मास्यूटिकल (दवा) उद्योग के शीर्ष वैश्विक सीईओ और व्यापारिक दिग्गजों के साथ एक राउंडटेबल बैठक को संबोधित करेंगे, जिसमें भारतीय स्वास्थ्य बाजार में नवीन चिकित्सा अनुसंधान, बौद्धिक संपदा और जेनेरिक दवाओं के आयात-निर्यात से जुड़ी परिचालन समस्याओं (ऑपरेशनल इश्यूज) को सुलझाने पर गहन विमर्श होगा।
इस कूटनीतिक यात्रा के दूसरे पड़ाव में पीयूष गोयल स्विट्जरलैंड के वित्तीय केंद्र ज्यूरिख का दौरा करेंगे, जहां वे प्रमुख स्विस कंपनियों, उद्यम पूंजीपतियों (वेंचर कैपिटलिस्ट) और वैश्विक निवेशकों के साथ सीधे संवाद कर भारत के बढ़ते विनिर्माण (मेक इन इंडिया), नवीकरणीय ऊर्जा और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में निवेश के अवसरों को प्रस्तुत करेंगे। केंद्रीय मंत्री के साथ उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) तथा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों का एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी इस यात्रा में शामिल है। आर्थिक जानकारों का मानना है कि इस दौरे से भारतीय सेवा प्रदाताओं, जैसे नर्सिंग, चार्टर्ड अकाउंटेंसी और आर्किटेक्चर से जुड़े पेशेवरों के लिए यूरोपीय बाजारों में काम करने की विधिक राहें और आसान होंगी।