नई दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय बायोएनर्जी ग्लोबल 2026 सम्मेलन के साथ भारत ने स्वच्छ ऊर्जा और हरित विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। राजधानी स्थित यशोभूमि इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर में शुरू हुए इस सम्मेलन में देश-विदेश से ऊर्जा विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, उद्योग प्रतिनिधि, नीति निर्माता और निवेशक एक मंच पर जुटे हैं। सम्मेलन का उद्देश्य जैव ऊर्जा क्षेत्र में नई तकनीकों, निवेश के अवसरों और टिकाऊ ऊर्जा समाधानों पर व्यापक चर्चा करना है, ताकि भारत को भविष्य में वैश्विक बायोएनर्जी हब के रूप में स्थापित किया जा सके।
सम्मेलन में 200 से अधिक कंपनियां और संस्थान अपनी नवीनतम तकनीकों, उपकरणों और उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनी में बायोगैस, बायोफ्यूल, बायोमास, कचरे से ऊर्जा उत्पादन, कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG), सतत विमानन ईंधन और चक्रीय अर्थव्यवस्था से जुड़े नवाचार आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन तकनीकों से ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में भी मदद मिलेगी।
सम्मेलन के दौरान आयोजित तकनीकी सत्रों में किसानों की आय बढ़ाने, कृषि अवशेषों के बेहतर उपयोग, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार जैसे विषयों पर विशेष चर्चा हो रही है। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने सरकार और निजी क्षेत्र के बीच मजबूत साझेदारी पर जोर देते हुए कहा कि जैव ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ने से भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में जैव ऊर्जा केवल वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत नहीं रहेगी, बल्कि औद्योगिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रमुख आधार बन सकती है। सम्मेलन में विदेशी प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी इस बात का संकेत है कि वैश्विक स्तर पर भारत की हरित ऊर्जा नीति और नवाचारों में बढ़ती रुचि दिखाई दे रही है।
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय आयोजन नई तकनीकों के आदान-प्रदान, निवेश आकर्षित करने और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। बायोएनर्जी ग्लोबल 2026 से निकले सुझाव और साझेदारियां भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिशन को नई दिशा देने के साथ-साथ हरित अर्थव्यवस्था के निर्माण में भी अहम योगदान दे सकती हैं।