नई दिल्ली: देश के प्रमुख थोक जिंस बाजारों (कमोडिटी मार्केट्स) में आवश्यक खाद्य सामग्रियों की कीमतों में मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले मजबूत संकेतों और घरेलू मांग में आई तेजी के कारण थोक बाजार में गेहूं, चीनी और अधिकांश खाद्य तेलों के दाम मजबूत हुए हैं। दूसरी ओर, दलहन बाजार से आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है, जहां तुअर और उड़द जैसी प्रमुख दालों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। इस बीच, देश के सबसे बड़े हिस्से में खाए जाने वाले औसत दर्जे के चावल का थोक भाव 3,888 रुपये प्रति क्विंटल पर पूरी तरह से स्थिर बना हुआ है, जिससे अनाज बाजार में एक बड़ा संतुलन देखा गया।
समीक्षाधीन सत्र के दौरान देश के थोक बाजारों में गेहूं की कीमत में 2 रुपये प्रति क्विंटल की आंशिक मजबूती दर्ज की गई, जिसके बाद इसके दाम 2,772 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गए। हालांकि, राहत की बात यह रही कि गेहूं के आटे (फ्लोर) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ और यह पिछले स्तर पर ही टिकी रही। मीठे के बाजार की बात करें तो त्योहारी और सीजनल मांग बढ़ने के कारण चीनी के भाव में 6 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई, जबकि गुड़ का औसत थोक भाव 16 रुपये प्रति क्विंटल तक उछल गया। दाल-दलहन खंड में मसूर की दाल जहां 10 रुपये प्रति क्विंटल महंगी हुई, वहीं आपूर्ति सुधरने से तुअर (अरहर) दाल में 20 रुपये, उड़द दाल में 19 रुपये और मूंग दाल में 3 रुपये प्रति क्विंटल की नरमी देखी गई।
खाद्य तेलों के बाजार में सबसे बड़ी तेजी दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर जारी तेजी है। मलेशियाई डेरिवेटिव एक्सचेंज में पाम ऑयल वायदा 17 रिंगिट बढ़कर 4,555 रिंगिट प्रति टन और अमेरिकी सोया तेल वायदा 0.32 प्रतिशत मजबूत होकर 75.57 सेंट प्रति पौंड पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते स्थानीय बाजार में पाम ऑयल 34 रुपये, सोया तेल 32 रुपये, वनस्पति घी 22 रुपये और सरसों तेल 18 रुपये प्रति क्विंटल महंगा हो गया। हालांकि, मूंगफली तेल के उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर रही, जिसके दाम में 32 रुपये प्रति क्विंटल की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आगामी मानसूनी बारिश के रुख पर ही अब कमोडिटी बाजार की अगली चाल निर्भर करेगी।