सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार (20 जुलाई 2026) को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत जबरदस्त बिकवाली और भारी गिरावट के साथ हुई। मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के चलते दलाल स्ट्रीट पर हड़कंप मच गया। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 650 से अधिक अंकों की बड़ी गिरावट के साथ धराशायी हो गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर 24,200 के नीचे फिसल गया। इस चौतरफा बिकवाली से निवेशकों के अरबों रुपये डूब गए और बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक बाजारों से मिले बेहद कमजोर रुझानों के अलावा ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) का 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचना बाजार के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुआ। चूंकि भारत अपनी घरेलू जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए ऊर्जा लागत बढ़ने से देश में मुद्रास्फीति (महंगाई) बढ़ने का सीधा खतरा उत्पन्न हो गया है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई कमजोरी और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय पूंजी बाजार से भारी फंड निकालना शुरू कर दिया है।
कारोबार के दौरान सबसे अधिक दबाव बैंकिंग, आईटी और ऑटोमोबाइल सेक्टर के शेयरों पर देखा गया। एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे दिग्गज बैंकिंग शेयरों के पहली तिमाही (Q1) के नतीजे बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप न रहने से निवेशकों में भारी निराशा देखी गई। हालांकि, संकट के इस दौर में रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ-साथ चुनिंदा फार्मा और एनर्जी शेयरों में मामूली खरीदारी से सूचकांकों को निचले स्तरों पर थोड़ा सहारा जरूर मिला, लेकिन यह सहारा व्यापक बाजार को लाल निशान से बाहर निकालने के लिए नाकाफी साबित हुआ।