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पति राज कौशल के निधन के बाद मदिरा बेदी ने लिया था थेरेपी का सहारा, भावुक होकर बयां किया अपना दर्द

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Posted On:Friday, July 17, 2026


मशहूर अभिनेत्री और होस्ट मंदिरा बेदी ने हाल ही में अपने दिवंगत पति राज कौशल को याद करते हुए एक भावुक बयान दिया है। उन्होंने बताया कि साल 2021 में पति के अचानक हुए निधन के बाद लगे गहरे सदमे से उबरने में थेरेपी और काउंसलिंग ने उनकी बहुत मदद की।
एक आगामी फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के दौरान मंदिरा बेदी अपने आंसू नहीं रोक पाईं और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) को लेकर खुलकर बात की। राज कौशल का निधन साल 2021 में महज 50 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से हो गया था।
20 साल पहले शुरू की थी थेरेपी
मंदिरा बेदी (54) ने बताया कि वह मानसिक स्वास्थ्य को बहुत गंभीरता से लेती हैं। उन्होंने कहा, "मैंने पहली बार करीब 20 साल पहले थेरेपी ली थी। जब मैंने अपनी मां को इसके बारे में बताया, तो उन्होंने हैरान होकर पूछा था कि 'क्यों? तुम्हें क्या हुआ है? तुम मुझसे बात कर सकती थी।' लेकिन मैंने उनसे कहा कि नहीं, मुझे एक प्रोफेशनल की जरूरत है ताकि मैं अपने दिमाग में चल रही चीजों को बाहर निकाल सकूं।"
मंदिरा ने आगे कहा, "जब भी मुझे लगा कि मेरी जिंदगी में कुछ ठीक नहीं है या संतुलन बिगड़ रहा है, मैंने थेरेपिस्ट और काउंसलर की मदद ली। इससे मुझे हमेशा बहुत फायदा हुआ। जब मैंने अपने पति को खोया, तो थेरेपी मेरे लिए इस दुख से उबरने (Healing) का सबसे बड़ा जरिया बनी।"
दुख से उबरने का कोई तय समय नहीं होता: विशेषज्ञ
मंदिरा बेदी के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए साइकोथेरेपिस्ट और लाइफ कोच डेल्ना राजेश ने बताया कि किसी करीबी को खोने का दुख वक्त के साथ कम जरूर हो सकता है, लेकिन वह पूरी तरह कभी खत्म नहीं होता।
उन्होंने कहा, "लोग अक्सर सोचते हैं कि 6 महीने या 1 साल बाद इंसान को आगे बढ़ (Move on) जाना चाहिए। लेकिन दुख कैलेंडर देखकर नहीं आता। हो सकता है कि कोई इंसान किसी दिन बहुत हँस रहा हो, काम कर रहा हो, और अगले ही दिन कोई पुरानी तस्वीर या खुशबू उसे फिर से उसी गम में ले जाए।"
दुख में कैसे करें अपनों की मदद?
विशेषज्ञ डेल्ना राजेश ने बताया कि जब कोई अपने जीवनसाथी को खो देता है, तो उसे सलाह से ज्यादा किसी के साथ (Presence) की जरूरत होती है। "मजबूत बनो" या "समय सब ठीक कर देगा" जैसी बातें कहने के बजाय निम्नलिखित तरीकों से मदद की जा सकती है:

  • लगातार संपर्क में रहें: अंतिम संस्कार के काफी समय बाद भी उनका हाल-चाल लेते रहें, क्योंकि जब सब अपनी जिंदगी में व्यस्त हो जाते हैं, तब अकेलापन ज्यादा परेशान करता है।
  • बात करने दें: उन्हें अपने दिवंगत जीवनसाथी के बारे में खुलकर बात करने दें, बिना यह सोचे कि वे 'मूव ऑन' नहीं कर पा रहे हैं।
  • व्यावहारिक मदद करें: सिर्फ यह कहने के बजाय कि "कोई जरूरत हो तो बताना", खुद आगे बढ़कर घर के कामों, कागजी कार्रवाई या खाने-पीने में मदद करें।
  • खास तारीखें याद रखें: जन्मदिन, शादी की सालगिरह या पुण्यतिथि जैसे दिनों पर वे ज्यादा भावुक हो सकते हैं, ऐसे समय में उनके साथ खड़े रहें।
  • प्रोफेशनल मदद की सलाह: अगर दुख बहुत ज्यादा बढ़ जाए, दैनिक कामकाज में दिक्कत आने लगे या गहरी निराशा (Depression) के लक्षण दिखें, तो थेरेपी लेने की सलाह दें।


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