पंजाब के लगभग 6 लाख राज्य सरकारी कर्मचारियों और सेवानिवृत्त पेंशनभोगियों के हक में बड़ा फैसला सुनाते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को करारा झटका दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायाधीश रोहित कपूर की पीठ ने पंजाब सरकार तथा पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) द्वारा दायर लेटर्स पेटेंट अपील (LPA) को पूरी तरह खारिज करते हुए सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखा। अदालत ने सख्त लहजे में निर्देश दिया है कि राज्य सरकार अपने सभी पात्र कर्मचारियों और पेंशनधारकों का लंबित महंगाई भत्ता (DA) तथा महंगाई राहत (DR) बकाया तुरंत प्रभाव से जारी करे।
हाईकोर्ट की दोहरी पीठ ने राज्य सरकार की इस दलील को सिरे से नकार दिया कि वित्तीय संकट के कारण बकाये का भुगतान रोक दिया गया था। पीठ ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों को मिलने वाले सेवा लाभ और कानूनी अधिकार वित्तीय बाधाओं का हवाला देकर रोके नहीं जा सकते। अदालत ने सरकार को निर्धारित समय-सीमा के भीतर समस्त एरियर जारी करने का आदेश दिया है। यदि सरकार तय समय सीमा में इस बकाया राशि का भुगतान करने में विफल रहती है, तो उसे देरी की अवधि के लिए 6 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से साधारण ब्याज का भुगतान करना होगा।
अदालत ने इसके साथ ही राज्य के मुख्य सचिव को पूरी भुगतान प्रक्रिया संपन्न कर इस माह के अंत तक अदालत में अनुपालन हलफनामा (Compliance Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है। फैसले में सबसे कड़ा रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स का एक-एक रुपया बकाया चुकता नहीं हो जाता, तब तक पंजाब सरकार मीडिया, प्रिंट या सोशल प्लेटफॉर्म्स पर किसी भी प्रकार के बड़े विज्ञापन अभियानों और गैर-जरूरी खर्चों पर जनता का पैसा व्यय नहीं कर सकती।