राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत और बेहद कड़ा पोस्ट साझा करते हुए इस पूरे घोटाले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष के केंद्रीय मंत्रियों और खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर गंभीर सवाल खड़े किए। मनसे प्रमुख ने तीखा तंज कसते हुए कहा, "इस बेहद गंभीर विषय पर देश के प्रधानमंत्री ने अपना वही प्रसिद्ध 'मौन' धारण कर लिया है। ऐसा लगता है कि दूसरी पार्टियों के विधायकों, सांसदों और पदाधिकारियों की तोड़-फोड़ और 'पळवापळवी' (भगा ले जाने) की इन्हें इतनी आदत हो चुकी है कि अब भगवान के दरबार में भक्तों के दान की हेराफेरी पर भी इनका मन सुन्न हो गया है।"
'राम मंदिर किसी एक दल की बपौती नहीं'
अपने पोस्ट में राज ठाकरे ने राम मंदिर आंदोलन के इतिहास को याद दिलाते हुए सत्ता पक्ष को घेरा:
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आंदोलन करोड़ों हिंदुओं का था: ठाकरे ने साफ शब्दों में कहा कि अयोध्या का राम मंदिर किसी एक राजनीतिक दल की निजी संपत्ति नहीं है। यह देश के करोड़ों हिंदुओं, साधु-संतों और उन असंख्य कारसेवकों की अटूट आस्था का प्रतीक है, जिन्होंने इस आंदोलन के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी।
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सार्वजनिक हो दान का हिसाब: उन्होंने मांग की कि राम मंदिर में आने वाले कैश, सोने-चांदी के आभूषणों और गुप्त दान का एक-एक पैसे का ठोस ऑडिट होना चाहिए और उसे जनता के सामने सार्वजनिक किया जाना चाहिए। भक्तों द्वारा दिया गया दान ट्रस्टियों या पुजारियों की जेब में जाने के बजाय सीधे भगवान के कार्यों में लगना चाहिए।
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कार्रवाई जमीन पर दिखे: राज ठाकरे ने कहा कि केवल 'हमारी नीयत साफ है' का राग अलापने से काम नहीं चलेगा। अगर देश की इतनी बड़ी आस्था के केंद्र में चोरी की पुष्टि शुरुआती एसआईटी (SIT) जांच में हो रही है, तो सरकार की चुप्पी संदिग्ध है। दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए जो एक मिसाल बने।
ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की सिफारिशों के बाद इस मामले में एफआईआर दर्ज कर कैश काउंटिंग और प्रबंधन से जुड़े करीब आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है, लेकिन विपक्ष इसे 'आईवाश' (दिखावा) बताते हुए बड़े चेहरों को बचाने का आरोप लगा रहा है।